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शनिवार, 27 अक्तूबर 2012

मेरे पैर नही भीगे ……………देखो तो !!!

मेरे पैर नही भीगे
देखो तो
उतरे थे हम दोनों ही
पानी के अथाह सागर में
सुनो………जानते हो ऐसा क्यों हुआ?

नहीं ना …………नहीं जान सकते तुम
क्योंकि
तुम्हें मिला मोहब्बत का अथाह सागर
तुम जो डूबे तो
आज तक नहीं उभरे
देखो कैसे अठखेलियाँ कर रही हैं
तुम्हारी ज़ुल्फ़ें
कैसे आँखों मे तुम्हारी
वक्त ठहर गया है
कैसे बिना नशा किये भी
तुम लडखडा रहे हो
मोहब्बत की सुरा पीकर
और देखो………इधर मुझे
उतरे तो दोनों साथ ही थे
उस अथाह पानी के सागर मे ………
मगर मुझे मिली ………रेत की दलदल
जिसमें धंसती तो गयी
मगर बाहर ना आ सकी
जो अपने पैरों पर मोहब्बत का आलता लगा पाती
और कह पाती ………
देखो मेरे पैर भी गीले हैं ……भीगना जानते हैं
हर पायल मे झंकार का होना जरूरी तो नहीं …………
सिमटने के लिये अन्तस का खोल ही काफ़ी है
सुना है
नक्काशीदार पाँव का चलन फिर से शुरु हो गया है
शायद तभी
मेरे पैर नही भीगे ……………देखो तो !!!

20 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कभी बिन पायल रुनझुन होती है
कभी पायल होकर भी आवाज़ नहीं .... मन की गति से ही सब संभव है

Onkar ने कहा…

वाह,क्या बात है

Minakshi Pant ने कहा…

वाह बेहद संवेदनशील रचना भावों को परिभाषित करने में सफल सुंदर रचना |

"अनंत" अरुन शर्मा ने कहा…

गहन भावपूर्ण अभियक्ति सुन्दर रचना वंदना जी

Ramakant Singh ने कहा…

वक़्त ठहर जाता है .सच कहा आपने

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

वाह जी बढ़ि‍या

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति!
ईद-उल-जुहा के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ|

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर..

संध्या शर्मा ने कहा…

हर पायल मे झंकार का होना जरूरी तो नहीं …
सिमटने के लिये अन्तस का खोल ही काफ़ी है...
बड़ी सुन्दरता से मन के कोमल भावों को शब्दों में ढाला है आपने... लाजवाब रचना वंदनाजी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रेम के अंतर को बखूबी लिखा है ... सुंदर अभिव्यक्ति

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

गहरी अभिव्यक्ति...

रचना दीक्षित ने कहा…

हर पायल मे झंकार का होना जरूरी तो नहीं …………
सिमटने के लिये अन्तस का खोल ही काफ़ी है

बहुत खूबसूरत.

mridula pradhan ने कहा…

bahot prabhawshali rachna.....

expression ने कहा…

वाह ....
बहुत सुन्दर वंदना...
अनु

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही गहरी अभिव्यक्ति...

mridula pradhan ने कहा…

behad sunder.....

Saras ने कहा…

वाह ....बहुत प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति

pran sharma ने कहा…

BAHUT KHOOB !

सदा ने कहा…

वाह ... क्‍या बात है
लाजवाब अभिव्‍यक्ति

Kailash Sharma ने कहा…

नक्काशीदार पाँव का चलन फिर से शुरु हो गया है
शायद तभी
मेरे पैर नही भीगे

....बहुत गहन अहसास...