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रविवार, 13 नवंबर 2011

उडान तो आसमां की तरफ़ ही होती है ना……………

अजनबी मोड
अजनबी मुलाकात
जानकर भी अन्जान
पता नही वजूद जुदा हुये थे
या …………
नहीं , आत्मायें कभी जुदा नही होतीं
वज़ूद तो किराये का मकान है
और तुम और मै बताओ ना
वजूद कब रहे
हमेशा ही आत्माओ से बंधे रहे
अब चाहे कितनी ही 
बारिशें आयें
कितने ही मोड अजनबी बनें
कितनी ही ख्वाहिशें दम निकालें
और चाहे चाय के कप दो हों 
और उनमे चाहे कितना ही 
पानी भर जाये
देखना प्यार हमेशा छलकता है
वो कब किसी कप मे
किसी बारिश की बूंद मे
या किसी फ़ूल मे समाया है
वो तो वजूद से इतर
दिलो का सरमाया है
फिर कैसे सोचा तुमने
हम जुदा हुये
हम तो हमेशा 
अलग होते हुये भी एक रहे
एक आसमां की तरह
एक पंछी की तरह
कहीं भी रहे 
उडान तो आसमां की तरफ़ ही होती है ना……………

30 टिप्‍पणियां:

रचना दीक्षित ने कहा…

बजूद तो किराये का मकान है आत्माएं कभी जुदा नहीं हो सकती.

सुंदर भाव और अत्यंत संवेदनशील प्रस्तुति.

पत्रकार-अख्तर खान "अकेला" ने कहा…

bhtrin or kdva sch udaan to aasman ki traf hi hoti hai jese pehle kabhi pndit ki dod mndir tk or mulla ki dod msjid tk hoti thi . akhtar khan akela kota rajathan

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सबकी उड़ाने ऊपर की ओर, पंख क्षितिज में

Human ने कहा…

बहुत अच्छे भाव,सार्थक व संदेशपूर्ण रचना !

shikha varshney ने कहा…

कुछ खास बिम्ब कविता को नया स्वरुप दे रहे हैं.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

//प्यार हमेशा छलकता है
वो कब किसी कप मे
किसी बारिश की बूंद मे
या किसी फ़ूल मे समाया है
वो तो वजूद से इतर
दिलो का सरमाया है//

सुन्दर... सुन्दर भावाभिव्यक्ति....
सादर बधाई स्वीकारें...

M VERMA ने कहा…

यह उड़ान कायम रहे ....
बहुत सुन्दर भाव

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

उड़ान हमेश ही ऊँचाई की ही तरफ होती है ..बहुत अच्छे भाव लिए हुए सुन्दर प्रस्तुति

Sunil Kumar ने कहा…

सुंदर भाव और संवेदनशील प्रस्तुति.....

रविकर ने कहा…

आपकी प्रस्तुति

सोमवारीय चर्चा-मंच पर

charchamanch.blogspot.com

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

सही है... आत्माएं कभी जुदा नहीं होतीं।

kshama ने कहा…

Kitna badhiya khayal hai...aatma kabhi juda nahee hoti....juda to kirayeke makan hote hain!

राजेश उत्‍साही ने कहा…

उड़ान जारी रहे।

mridula pradhan ने कहा…

beshak......udan to aasman ki taraf hi hoti hai,behad bhawpoorn.......

PRIYANKA RATHORE ने कहा…

सुंदर भाव और अत्यंत संवेदनशील प्रस्तुति.

sushma 'आहुति' ने कहा…

सार्थक भावो से रची खुबसूरत रचना.....

मनोज कुमार ने कहा…

शारीरिक रूप से भले जुदा हों, मन तो जुदा नहीं होता। और तब एक उड़ान आसमां की तरफ़ ही होती है ना ...!

अनुपमा पाठक ने कहा…

प्यार हमेशा छलकता है...
सुंदर!

Udan Tashtari ने कहा…

बजूद तो किराये का मकान है आत्माएं कभी जुदा नहीं हो सकती.

-अति उत्तम!!!

वाणी गीत ने कहा…

पंछी कही भी उडे , उड़ान तो आसमान की ओर ही होगी ...
सबकी मंजिल वही है !

Brijendra Singh... (बिरजू, برجو) ने कहा…

"वजूद तो किराये का मकान है.."
बेहतरीन ख्याल..

dheerendra ने कहा…

बहुत सुंदर रचना बधाई....नई पोस्ट में स्वागत है

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

Pallavi ने कहा…

आत्मायें कभी जुदा नही होतींवज़ूद तो किराये का मकान है बहुत कम शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी आपने बढ़िया प्रस्तुति.......

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बहुत बढ़िया कविता..

Kailash C Sharma ने कहा…

आत्मायें कभी जुदा नही होतीं
वज़ूद तो किराये का मकान है
और तुम और मै बताओ नावजूद कब रहे
हमेशा ही आत्माओ से बंधे रहे

....बहुत भावपूर्ण और संवेदनशील अभिव्यक्ति...लाज़वाब

NISHA MAHARANA ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
बालदिवस की शुभकामनाएँ!

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर , सर्थक संदेश देती सशक्त रचना...

कुमार राधारमण ने कहा…

बहिर्मुखी प्रेम समर्पण मांगता है,अंतर्मुखी समर्पण करता है।