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बुधवार, 12 अगस्त 2009

एक भाई का दर्द

एक बेबस भाई की मजबूरी
कोई क्या जाने
बेतरतीब से बिखरे बाल ,
पपडाए होंठ, वीरान आँखें
मैली सारी में लिपटी
इक जिंदा लाश को जब देखा हो
बुखार से तपती देह में भी
उफ़ न कर पाए जो
मर - मर कर हर काम
करती जाए जो
और फिर भी न किसी से
शिकायत कर पाए जो
ऐसा हाल जिस भाई ने
देखा हो अपनी बहन का
कितनी मौत मरा होगा
और अपनी बेबसी से लड़ा होगा
खून तो उसका भी खौला होगा
बंद जुबान को खोलना चाहा होगा
इंसान की खाल में छुपे भेडियों से
बहन को बचाना चाहा होगा
उसकी पीड़ा से कितना तडपा होगा
मगर बहन की आंखों में छुपी वेदना ने
हर भेद खोल दिया होगा
चुप रहने को मजबूर कर दिया होगा
क्यूंकि ज़िन्दगी तो उसे
वहीँ गुजारनी होगी
इसलिए खामोशी का ही
ज़हर पिया होगा
और भाई चाहकर भी
कुछ न कर पाया होगा
नाज़ों - नखरों से पली बहन की
दुर्दशा पर खून के आंसू रोया होगा
बहन की कसम से बंधे रिश्ते को
घुट-घुटकर कैसे निभाया होगा
और उसका दर्द माँ बाप से भी
न कह पाया होगा
और राखी का वचन
इस तरह निभाया होगा
बहन की रक्षा के वचन ने
किस कदर रुलाया होगा
तिल-तिल कर बिलखती
बहन को देख
कैसे आक्रोश को
जज्ब कर पाया होगा
अपने भाई होने के फ़र्ज़ को
कैसे छुपाया होगा
और आंखों में समंदर लिए
चुपचाप उसकी दहलीज से
थके क़दमों से चला आया होगा

28 टिप्‍पणियां:

अर्शिया अली ने कहा…

Dil ko chhu gayee aapkee rachnaa.
{ Treasurer-S, T }

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सम्बन्धों से सजी इस मनोव्यथा को आपने शब्दों की
माला में बेहद खूबसूरती के साथ गूँथा है।
इस सशक्त अभिव्यक्ति के लिए, बधाई।
ऐसा ही कुछ और भी लिखने का प्रयास करें।

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर रचना !!

विनय ‘नज़र’ ने कहा…

अत्यन्त सुन्दर रचना

राकेश कुमार ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना,बहन के प्रति एक भाई की पीडा को बहुत सुन्दर ढन्ग से पिरोया है,

ऐसा हाल जिस भाई ने
देखा हो अपनी बहन का
कितनी मौत मरा होगा
और अपनी बेबसी से लड़ा होगा
खून तो उसका भी खौला होगा
बंद जुबान को खोलना चाहा होगा

सचमुच बहुत सुन्दर और सामयिक रचना, यह भारतीय समाज की व्यथा है , हम एक ओर नारी की पूजा करते है और हमारे ही घर मे बहन और बेटिया घरेलू हिन्सा की शिकार है.

एक भाई को सचमुच बहुत पीडा होती होगी ऐसी दुर्दशा को देखकर.

इतनी सुन्दर रचना लिखने के लिये बधाई, आप इसे निरन्तर नये आयाम देते रहे, मा सरस्वती से प्रार्थना है कि वे आपको आपकी मन्जिल प्रदान करे.

सादर

vinay ने कहा…

बेचरा बेबस भाइ,बेहन की बेबसी को देख कर,कुच ना कर पाने को विवश,सुन्दर अभिवयक्ति

ओम आर्य ने कहा…

bahut hi badhiya abhiwyakti.........

भंगार ने कहा…

bahut achha lgaa

M VERMA ने कहा…

वन्दना जी
आज आपने तो वेदना और अनुभूति का इतना गहरा मिश्रण किया है कि ---

kshama ने कहा…

Dard se abharee aah hai ye!

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

ये भी एक कड़वा सच जिसे आपने अपने शब्दों से कह दिया। सच इस जिदंगी को जीना इतना आसन नही। ये कडवे सच हमें ये अहसास करा जाते है कि हमारा समाज अभी भी वो समाज नही बन सका जो उसे होना चाहिए था। खैर एक अच्छी अभिव्यक्ति।

vikram7 ने कहा…

बहन को बचाना चाहा होगा
उसकी पीड़ा से कितना तडपा होगा
मगर बहन की आंखों में छुपी वेदना ने
हर भेद खोल दिया होगा
चुप रहने को मजबूर कर दिया होगा
अति संवेदनशील रचना

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भावुक कर देने वाली रचना बधाई ...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हो के मजबूर मुझे उसने बुलाया होगा...............
पता नही क्यों आपकी कविता पढ़ कर ये गीत याद आ गया.......... बहुत ही संवेदनशील रचना है.........सच में मजबूर भाई के खौलते खून ने उसे बहुत जला दिया होगा अन्दर तक........... आपके शब्दों ने वो जज्बात उभार कर रख दिए हैं

Priya ने कहा…

bhaav acchi tarah bikhere hai aapne

Prem Farrukhabadi ने कहा…

Vandana ji,
Rachna ke bhav man ko vyathit karne mein samarth hain.vyatha to vyatha hai vyathit to kar hi deti hai.aise bhav rachna mein pirone ke liye hardik badhai!!

vallabh ने कहा…

सुन्दर रचना...... वर्तमान दौर में सताई और शोषित बहन के भाई का जो मार्मिक चित्र आपने कविता में उकेरा है उसके लिए बधाई स्वीकारें.......

dr. ashok priyaranjan ने कहा…

nice poem.

http://www.ashokvichar.blogspot.com

योगेश स्वप्न ने कहा…

is nazm ko jisne bhi padha hoga
uski aankhon men
ashkon ka sailaab
umad aaya hoga.

kam se kam mere to.

प्रीति टेलर ने कहा…

Vandanaji, ek khamoshi aur dard kuchh kahne ke liye asamarth hai ....

anuradha srivastav ने कहा…

सशक्त अभिव्यक्ति..........

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vandana,

bhai -bahan ke prem ko aapne bahut hi acchi tarah se darshaaya hai ... bhaav bahut gahre hai , lekhan nirantar accha ho raha hai ....

namaskar

vijay
http://poemsofvijay.blogspot.com/

Nirmla Kapila ने कहा…

हन को बचाना चाहा होगा
उसकी पीड़ा से कितना तडपा होगा
मगर बहन की आंखों में छुपी वेदना ने
हर भेद खोल दिया होगा
चुप रहने को मजबूर कर दिया होगा
वन्दना जी आंम्खें नम हो गयी नहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति है शुभकामनाये

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर.

कैटरीना ने कहा…

Ati sundar.
वैज्ञानिक दृ‍ष्टिकोण अपनाएं, राष्ट्र को उन्नति पथ पर ले जाएं।

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

kuch zayada hi antas main ghus gaya tha...

...kaun kehta hai ki purush nahi rote? apki kavita ne bhavook kar diya.

"...नाज़ों - नखरों से पली बहन की
दुर्दशा पर खून के आंसू रोया होगा
बहन की कसम से बंधे रिश्ते को
घुट-घुटकर कैसे निभाया होगा
और उसका दर्द माँ बाप से भी
न कह पाया होगा
और राखी का वचन
इस तरह निभाया होगा"


purush hriday ki bahut acchi vyakhya.

शरद कोकास ने कहा…

ये रिश्ते ही दर्द पैदा करते है ये रिश्ते ही दर्द दूर करते है । मार्मिक रचना ।

APNA GHAR ने कहा…

ek bhai ka dard. behan ki vyatha ka marmik chitran karti rachna ashok khatri