अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

बुधवार, 11 मार्च 2009

ये कैसी होली

कहीं तो रंग ,अबीर ,गुलाल उडाते
रंगों की बोछार उडाते
होली लोग मनाते
और
कहीं कोई जिंदगी को
जीने की जुगाड़ लगाता
होली के इस हुडदंग में
शाम की रोटी के जुगाड़ में
गुब्बारों की खाली
पन्नियाँ बटोरता जीवन
क्या उनमें उमंग नही
होली की वो तरंग नही
हाय ! यह कैसी होली है
यह कैसी होली है ?

13 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

कचरे और कबाड़े में, जो रोजी खोज रहे हैं,
गीत उन्हें भी सब त्योहारों के, गाने आ जायें।
मेरी यही प्रार्थना है, उस जगत-नियन्ता से,
भोले चेहरों पर भी,सुख की मुस्कानें छा जाये।।

संगीता पुरी ने कहा…

होली की ढेरो शुभकामनाएं ...

PREETI BARTHWAL ने कहा…

आपको होली की शुभकामनाएं।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

होली पर्व की आपको भी शुभकामना बधाई .

Mired Mirage ने कहा…

जी सच है, दुखद है।
होली की शुभकामनाएँ।
घुघूती बासूती

Udan Tashtari ने कहा…

होली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

bahut maarmik kavita ...
badhai ho

प्रीति टेलर ने कहा…

ati sundar jindagi ka rukh liya hai...

computer me ek bada fault aane ki vajah se aap ko holi mubarak na kah payi to ab
belated holi mubarak...

Vibha Rani Shrivastava ने कहा…

आपकी ये रचना कल 6 - 3 - 2012 नई-पुरानी हलचल पर पोस्ट की जा रही है .... ! आपके सुझाव का इन्तजार रहेगा .... !!

Saras ने कहा…

यह विडम्बना तो जीवन का एक कटु पहलु रहा है ....मार्मिक रचना

Saras ने कहा…

इस विडम्बना को तो कोई नहीं नकार सका है ....मार्मिक रचना

expression ने कहा…

होली का एक रंगहीन पहलु....
सार्थक रचना...

होली की शुभकामनाएँ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक प्रश्न .... अच्छी प्रस्तुति