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गुरुवार, 22 नवंबर 2018

कुछ_ख्याल_कुछ_ख्वाब

1
मेरे इर्द गिर्द टहलता है
कोई नगमे सा
मैं गुनगुनाऊं तो कहता है
रुक जरा 
इस कमसिनी पर कुर्बान हो तो जाऊँ
जो वो एक बार मिले तो सही
खुदा की नेमत सा
2
दिल अब न दरिया है न समंदर ...
तुम चीरो तो सही
शोख नज़रों के खंजर से
रक्स करती मिलेगी रूह की रक्कासा
उदासियों के उपवन में
3
आओ आमीन कहें
और मोहब्बत के ख्वाबों को एक बोसा दे दें
कि
रुख हवाओं का बदलना लाज़िमी है
4
न रास्ते हैं न ख्वाब न मंजिलें
कहो, कहाँ चलें
कि उम्र फ़ना हो जाए और मोहब्बत सुर्खरू
5
बिना किसी तालीम के हमने तो जी ली
कि
जो कायदों में बंधे
वो भला कैसी मोहब्बत

2 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (23-11-2018) को "कार्तिकपूर्णिमा-गुरू नानकदेव जयन्ती" (चर्चा अंक-3164) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
"कार्तिकपूर्णिमा-गुरू नानकदेव जयन्ती" की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (23-11-2018) को "कार्तिकपूर्णिमा-गुरू नानकदेव जयन्ती" (चर्चा अंक-3164) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
"कार्तिकपूर्णिमा-गुरू नानकदेव जयन्ती" की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'