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सोमवार, 22 जनवरी 2018

हे वीणावादिनी हे तमहारिणी

 
 
हे वीणावादिनी हे तमहारिणी
होकर दयाल दे ये वरदान
खुशहाल हो सकल संसार

सुबुद्धि का वास हो
कोई न उदास हो
जीवन में उल्लास हो
बस तुझ पर ही विश्वास हो

बसंत सा हर मन हो
हर आँगन तेरा घर हो
उमंग का नर्तन हो
सप्त सुरों सा जीवन हो

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें



4 टिप्‍पणियां:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (23-01-2018) को "जीवित हुआ बसन्त" (चर्चा अंक-2857) पर भी होगी।
--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
बसन्तपंचमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Jyoti Khare ने कहा…

बसंत का सुखद और प्रेम भरा आगमन
बहुत सुंदर रचना
बधाई
सादर

Jyoti Khare ने कहा…

बसंत का सुखद और प्रेम भरा आगमन
बहुत सुंदर रचना
बधाई
सादर

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ