अनुमति जरूरी है

मेरी अनुमति के बिना मेरे ब्लोग से कोई भी पोस्ट कहीं ना लगाई जाये और ना ही मेरे नाम और चित्र का प्रयोग किया जाये

my free copyright

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

शनिवार, 1 सितंबर 2012

देख तो ज़रा एक कश लेकर………………

अपने दिल की चिलम मे
तेरी सांसों को फ़ूंका मैने
फिर चाहे खुद फ़ना हो गयी
देख तो ज़रा एक कश लेकर………
हर कश में जो गंध महकेगी
किसी के जिगर की राख होगी

छलनियाँ भी शरमा जाएँ जहाँ
ये ऐसी दिल की शबे बारात होगी 


अब और क्या नूर-ए-नज़र करूँ
ना सुबह होगी ना शाम होगी
कह दो रौशनियों से कोई जाकर
अब ना कभी मुलाकात होगी



जानते हो ना

चिलमों की धीमी आँच

कैसे धीमे धीमे ज़हर सी

उतरती है रूह के लिहाफ़ मे 
धुओं के छल्लों पर निशान भी नही मिलेंगे

बस तू एक कश लेकर तो देख
दर्द की राखों मे चीखें नही होतीं …………




22 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बाहर की हवा अन्दर भरकर, अपने नशे में..

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

adbhud vimb.. bahut badhiya

सदा ने कहा…

गहन भाव लिए बेहतरीन प्रस्‍तुति।

Reena Maurya ने कहा…

क्या कहने....
बार - बार पढ़ने को मन
चाहता है...
बहुत ही बेहतरीन रचना....
..

Onkar ने कहा…

बहुत सुन्दर

कुश्वंश ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रयोगधर्मी कविता बधाई

expression ने कहा…

वाह.....
लाजवाब वंदना जी...
बहुत सुन्दर.

अनु

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जितना लम्बा कश - ज़िन्दगी उतने सबक देगी

राहुल कुमार पाण्डेय ने कहा…

गहराइयाँ हैं ......अति उत्तम रचना है आपकी!!!!!

***Punam*** ने कहा…

क्या बात है वंदना....!!
हर कश में मज़ा ही आता है...
भले ही गला या आंख जले !

Shah Nawaz ने कहा…

वाह... गहरे भाव हैं वंदना जी...

pran sharma ने कहा…

VANDANA JI , AAPKEE LEKHNI TO JADU
JAGAA RAHEE HAI .

pran sharma ने कहा…

VANDANA JI , AAPKEE LEKHNI TO JADU
JAGAA RAHEE HAI .

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) ने कहा…

नये विषय पर अनोखे दृष्टिकोण के साथ सुंदर रचना.

रचना दीक्षित ने कहा…

मामला बहुत गंभीर होता जा रहा है.

बेजोड प्रस्तुति.

Sanju ने कहा…

nice presentation....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (02-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गयी है!
सूचनार्थ!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सब धुआँ धुआँ ..... बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गहरे भाव ... जीवन भी तो सिगरेट के काश की तरह ही है ... निकल जाने के बाद कुछ नहीं होता धुँआ होने के सिवा ...

mridula pradhan ने कहा…

wah.....kya likha hai.....

Ramakant Singh ने कहा…

गहरी चेतावनी .अद्भुत अद्भुत बहुत सुन्दर

इमरान अंसारी ने कहा…

लाओ ज़रा एक हाथ बढ़ाओ.....हम भी कश लें।