झूठ की दुनिया जीते हम लोग
होता है जब साबका यथार्थ से
सारे पर्दे हट जाते हैं
सारी धुंध छंट जाती है
हर नकाब उतर जाता है
अपनेपन और परायेपन का
दोस्तियों का
दुश्मनी का
एक खामोशी में खो गयी जब
न पूछा हाल किसी ने
न आयी याद किसी को
न की बात किसी ने
बस तिलिस्म टूट गया
यही है जीवन दर्शन
आप हो जाते हो विदा खामोशी से
चुपचाप, बिना कुछ कहे
कोई याद नहीं रखता
न रखेगा
संसार चलता रहेगा
मान लो
स्वीकार लो
यही है सत्य जीवन का
हर पल आखिरी होता है
कोई किसी का न होता है
संसार आपसे पहले भी था
आपके बाद भी रहेगा
बेमुरव्वती ही है इसका हासिल
जीयो तो ऐसे
कि कोई ख्वाहिश न हो
किसी की चाह न हो
किसी से चाह न हो
मित्र रिश्ते संबंध
खोटे सिक्कों से भरी वो थैली होते हैं
जरूरत के वक्त जो चला नहीं करते
सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंवंदन
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में शनिवार 08 अगस्त, 2026 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!
जवाब देंहटाएंजीयो तो ऐसे
जवाब देंहटाएंकि कोई ख्वाहिश न हो
काश
सही है, जीवन को एक खेल की तरह जीना आ जाये तो कोई ग़म नहीं
जवाब देंहटाएंबेहतरीन रचना
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना
जवाब देंहटाएंजीवन दर्शन को दिखाती प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंआज लगभग १०-१२ साल बाद सही से ब्लॉग खोल कर देखा , जितने भी उस समय के ब्लॉग थे सभी पर अंतिम रचना 10 12 साल या 8 -9 साल पुराणी दिख रही है! 5 -4 ब्लॉग पर नयी रचनाए देखने को मिली! बहुत अच्छा लगा जो आप अभी तक ब्लॉग पर निरंतर बने हुए हो...